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भारत में Range Rover Evoque अब लोकल: JLR की नई मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रैटेजी और ग्राहकों को फायदा

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Ajay Juneja

Published: February 9, 2026

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RANGE ROVER

Tata Motors की तमिलनाडु प्लांट में Range Rover Evoque का लोकल प्रोडक्शन शुरू होना Jaguar Land Rover (JLR) की भारतीय बाजार रणनीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अब तक JLR भारत में ज्यादातर मॉडल्स को इंपोर्ट कर बेचता था, लेकिन Evoque को लोकल असेंबली से कंपनी ने कॉस्ट कम करने, सप्लाई चेन मजबूत करने और प्रतिस्पर्धा से बेहतर मुकाबला करने की कोशिश शुरू कर दी है। Evoque JLR का सबसे किफायती और ज्यादा वॉल्यूम वाला मॉडल है, इसलिए इसे लोकल बनाने का फैसला सबसे तर्कसंगत है। आइए इस कदम के महत्व, फायदों और चुनौतियों को विस्तार से समझते हैं।

लोकल प्रोडक्शन का फैसला क्यों महत्वपूर्ण?

Range Rover Evoque JLR का एंट्री-लेवल लग्जरी SUV है, जो भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले मॉडल्स में से एक रहा है। इसे इंपोर्ट करने पर हाई ड्यूटी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट के कारण कीमत काफी ऊंची हो जाती थी। अब तमिलनाडु प्लांट में लोकल असेंबली से:

  • इंपोर्ट ड्यूटी में कमी आएगी
  • लॉजिस्टिक्स खर्च कम होगा
  • डिलीवरी टाइमलाइन बेहतर होगी
  • कीमतों में संभावित कमी या बेहतर वैल्यू मिल सकती है

यह कदम JLR की भारत में लोकलाइजेशन रणनीति को मजबूत करता है। कंपनी पहले से ही कुछ पार्ट्स लोकल सोर्सिंग कर रही थी, लेकिन अब पूरा असेंबली भारत में होगा। इससे JLR भारत को सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग बेस के रूप में भी देख रहा है।

प्रतिस्पर्धा का दबाव और बाजार की हकीकत

भारतीय लग्जरी कार बाजार में Mercedes-Benz, BMW और Audi ने पहले से ही लोकल असेंबली बढ़ा दी है। इन ब्रांड्स ने C-Class, 3 Series, Q5 जैसी कारों को भारत में बनाकर कीमतें कंट्रोल की हैं और डिलीवरी तेज की है। JLR को भी अब इसी रास्ते पर चलना पड़ा है। Evoque को लोकल बनाने से कंपनी इन ब्रांड्स के साथ बेहतर मुकाबला कर सकेगी।

भारत में लग्जरी SUV सेगमेंट तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन खरीदार अभी भी कीमत-संवेदनशील हैं। Evoque की कीमत ₹65-70 लाख के बीच है, जो कई ग्राहकों के लिए ऊंची है। लोकल प्रोडक्शन से अगर कीमत में कमी आई या वैल्यू बढ़ी, तो यह सेगमेंट में JLR की हिस्सेदारी बढ़ा सकता है।

फायदे और चुनौतियां

फायदे:

  • कॉस्ट में कमी से बेहतर प्राइसिंग या मार्जिन
  • तेज डिलीवरी और स्टॉक उपलब्धता
  • लोकल पार्ट्स यूज से सप्लाई चेन मजबूत
  • भारत में मैन्युफैक्चरिंग से ब्रांड की इमेज मजबूत

चुनौतियां:

  • लग्जरी कारें अभी भी सीमित खरीदारों के लिए हैं – लोकलाइजेशन से वॉल्यूम बहुत बढ़ने की गारंटी नहीं
  • क्वालिटी कंट्रोल में कोई कमी नहीं होनी चाहिए, वरना ब्रांड इमेज को नुकसान
  • नए प्लांट में प्रोडक्शन स्केल-अप में समय लग सकता है

आगे क्या होगा?

JLR ने Evoque को लोकल बनाने से शुरुआत की है, क्योंकि यह हाई-वॉल्यूम मॉडल है। आने वाले समय में Defender, Range Rover Velar या Discovery जैसे मॉडल्स पर भी लोकलाइजेशन बढ़ सकता है। लेकिन असली सफलता तब मिलेगी जब कंपनी लोकल प्रोडक्शन के फायदों को ग्राहकों तक पहुंचाए – बेहतर कीमत, ज्यादा फीचर्स या तेज सर्विस के रूप में।

भारत में लग्जरी SUV बाजार में प्रतिस्पर्धा बहुत तेज है। Mercedes, BMW और Audi पहले से लोकल असेंबली कर रहे हैं। JLR का यह कदम सही दिशा में है, लेकिन कंपनी को सिर्फ कॉस्ट कम करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। ग्राहकों को ज्यादा वैल्यू, बेहतर सर्विस और ब्रांड एक्सपीरियंस देना होगा। Evoque का लोकल प्रोडक्शन JLR के लिए एक नई शुरुआत है – अब देखना यह है कि कंपनी इसे सिर्फ मार्जिन बढ़ाने के लिए इस्तेमाल करती है या भारतीय ग्राहकों तक ज्यादा पहुंच बनाने के लिए।

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